अगर राजस्थान में अभी कुछ चर्चा है तो वो सिर्फ राजस्थान विधानसभा चुनावों की है और चुनावों को लेकर दोनों प्रमुख पार्टियों कांग्रेस और भाजपा में घमासान छिड़ा है। भाजपा सिर्फ कमल के चेहरे पर आगे बढ़ रही है तो कांग्रेस में गहलोत ने अपना चेहरा सबसे आगे रखा है। जनता के लिए हर बड़ा ऐलान गहलोत खुद कर रहे हैं और इससे उनको साधने की कोशिश भी की जा रही है।
प्रियंका गांधी की सभा में भी गहलोत ने ही दो बड़ी गारंटी लॉन्च की और इसके बाद वॉर रूम से और पांच गारंटियों की घोषणा भी उन्होंने ही की। हालांकि, प्रदेश में आचार संहिता लागू होने के बाद प्रियंका गांधी दो बड़े दौरे यहां कर चुकी हैं। लेकिन इससे उलट राहुल गांधी ने अब तक राजस्थान का रुख नहीं किया है। हालांकि, वे मध्यप्रदेश में भी नहीं गए हैं।
मौजूदा सियासी माहौल देखा जाए तो लगता है कि आलाकमान ने राजस्थान का चुनाव गहलोत के भरोसे ही पूरी तरह छोड़ दिया है। टिकट बंटवारे में भी गहलोत की ही चली। उन्होंने न सिर्फ पार्टी में अपने समर्थकों को टिकट दिलवाए। बल्कि निर्दलीय विधायकों और बीजेपी के बागियों को भी पार्टी में लाकर टिकट दिलवाए। कांग्रेस सूत्रों का कहना है कि गहलोत फिलहाल राजस्थान में जैसा चाह रहे हैं, वैसा ही यहां हो रहा है।
कैबिनेट मंत्री महेश जोशी और शांति धारीवाल के टिकट में हो रही देरी को लेकर जो कयास लगाए जा रहे हैं। उसे लेकर भी सूत्रों का कहना है कि इन दोनों नेताओं को भी टिकट मिलना तय है।