राजस्थान विधानसभा चुनाव के लिए कांग्रेस ने उम्मीदवारों की चौथी लिस्ट जारी कर दी है। कांग्रेस की चौथी लिस्ट में 56 उम्मीदवारों के नामों की घोषणा की है। लिस्ट में 7 विधायकों के टिकट कटे हैं। चौथी सूची आने के बाद अब सियासी गलियारों में इस बात की चर्चा ने और ज़ोर पकड़ लिया है कि आखिर सरकार के ताकतवर मंत्री महेश जोशी और शांति धारीवाल को अब तक टिकट क्यों नहीं मिला ?
इन चर्चाओं के पीछे तर्क भी है, क्योंकि गहलोत सरकार जब भी संकट में आई दोनों मंत्री गहलोत के साथ फ्रंटफुट पर मौजूद रहे। सचिन पायलट जब अपनी ही सरकार के खिलाफ मानेसर के एक होटल में अपने समर्थक विधायकों के साथ चले गए थे, तब महेश जोशी सचेतक की भूमिका में थे। वहीं धारीवाल के बयान मीडिया में काफी चर्चा में रहे थे।
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पिछले दिनों कांग्रेस की केंद्रीय चुनाव समिति की बैठक के दौरान एक खबर ने खूब ध्यान खींचा। जिसके मुताबिक धारीवाल के नाम को लेकर सोनिया गांधी को कुछ आपत्ति थी। कहा यह भी गया कि राहुल गांधी ने मीटिंग में धारीवाल के नाम पर हो रही चर्चा के दौरान कहा कि 'भारत जोड़ो यात्रा के दौरान इनकी काफी शिकायतें आईं थीं'।
शांति धारीवाल का एक बयान खूब चर्चा में आया जिसमें उन्होंने कहा था कि "कौन आलाकमान, राजस्थान में आलाकमान सिर्फ अशोक गहलोत हैं।' कहा ये भी जा रहा है कि इस बात से कांग्रेस आलाकमान उनसे नाराज़ है।
जयपुर में 25 सितंबर को AICC की तरफ से अजय माकन और मल्लिकार्जुन खड़गे विधायक दल की बैठक में शामिल होने आये थे। उस दिन अशोक गहलोत जयपुर में नहीं थे। तब गहलोत समर्थक विधायकों ने बैठक का बहिष्कार किया था। उनका कहना था कि जब तक अध्यक्ष का चुनाव नहीं हो जाता CM गहलोत ही रहें। अगर वो कांग्रेस के अध्यक्ष बनते हैं तो मुख्यमंत्री अशोक गहलोत की पसंद का होना चाहिए।
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वहीं कांग्रेस के अब तक 151 उम्मीदवारों में महेश जोशी का नाम भी ग़ायब है। ऐसी चर्चाएं हैं कि जोशी का उनके विधानसभा क्षेत्र में काफी विरोध है और वो वहां से चुनाव नहीं लड़ना चाहते। इस बात की भी ख़बरें थीं कि जोशी जयपुर की किशनपोल सीट से टिकट चाहते थे। लेकिन कांग्रेस ने किशनपोल से एक बार फिर अमीन कागज़ी को मैदान में उतार दिया है। महेश जोशी के बेटे पर रेप के भी आरोप लगे हैं। जिसके बाद उनकी छवि का काफी नुकसान हुआ है।