कहते हैं कि बदनाम करने में एक मिनट लगता है, लेकिन इज़्ज़त बनाने में सदियों लग जाती है। मौजूदा वक़्त में, हमारा देश एक ऐसी ही जंग लड़ रहा है जो बदनामी और इज़्ज़त की उस दहलीज पर खड़ा है, जहाँ हमारा निजाम हर एक दिन देश का मजाक बनाने को लग रहा है। हम यहां किस मजाक, इज़्ज़त और बदनामी की बात कर रहे हैं। इस खबर में आप यहीं जानेंगे।
देश के सबसे बड़े राजनैतिक दल भारतीय जनता पार्टी के आईटी सेल के इंचार्ज अमित मालवीय के एक ट्वीट ने फिर से चर्चा के साथ विवादों को जन्म दे दिया है। जिससे लगता है कि हमारी राजनीति विवादों के बिना चल ही नहीं सकती। इस ट्वीट में अमित मालवीय ने कांग्रेस पार्टी के दिग्गज नेता रहे स्वर्गीय राजेश पायलट पर वर्ष 1966 में मिजोरम में बम गिराने का ज़िक्र किया है।
जिसके बाद से इस ट्वीट पर कांग्रेस पार्टी के नेताओं ने भड़कते हुए कड़ी प्रतिक्रिया दी और अमित मालवीय से माफ़ी मांगने को कहा है। इस कड़ी प्रतिक्रिया में सबसे पहला जवाब सचिन पायलट का आया जो कि राजेश पायलट के बेटे है और कांग्रेस के बड़े नेता है। सचिन पायलट ने अमित मालवीय के आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए उन्हें काल्पनिक, तथ्यहीन और भ्रामक करार दिया है।
दरअसल मामला ये है कि भाजपा आईटी सेल के इंचार्ज अमित मालवीय ने एक ट्वीट में लिखा, 'राजेश पायलट और सुरेश कलमाड़ी भारतीय वायुसेना के उन विमानों को उड़ा रहे थे, जिन्होंने 5 मार्च 1966 को मिजोरम की राजधानी आइजोल पर बम गिराये थे। बाद में इन दोनों को कांग्रेस पार्टी के टिकट पर सांसद और सरकार में मंत्री भी बनाया गया।
अमित मालवीय के स्वर्गीय राजेश पायलट को लेकर किए गए ट्वीट पर राजस्थान के पूर्व डिप्टी सीएम सचिन पायलट ने उनके आरोपों पर पलटवार करते हुए कहा कि, 'स्व. राजेश पायलट 29 अक्टूबर 1966 को भारतीय वायु सेना में कमीशन हुए थे। यह कहना कि उन्होंने 5 मार्च 1966 में मिजोरम में बमबारी करी थी - काल्पनिक है, तथ्यहीन है और पूरी तरह से भ्रामक है।' पायलट ने आगे यह भी कहा कि राजेश पायलट 80 के दशक में एक राजनेता के रूप में मिजोरम में युद्ध विराम करवाने और स्थायी शांति संधि स्थापित करवाने गए थे और इसमें उन्होंने महत्वपूर्ण भूमिका ज़रूर निभाई थी।'
इस ट्वीट विवाद ने कांग्रेस और भाजपा ने देश की राजनीति में एक और बहस को जन्म दे दिया है।