द नगरी न्यूज़ डेस्क : लोकसभा चुनाव के नतीजे आने के बाद अब हार और जीत पर मंथन शुरू हो गया है. अब लोग चाय और पान की दुकान पर बैठा कर चर्चा कर रहे हैं कि आखिर अयोध्या जैसी सीट पर भाजपा क्यों हारी. केंद्र और प्रदेश सरकार ने अयोध्या में विकास की गंगा बहाई, राम मंदिर बना, एयरपोर्ट बना, अंतरराष्ट्रीय स्तर का अयोध्या धाम का रेलवे स्टेशन बना, राम पथ बना और राम की पैड़ी की सुंदरता बढ़ाई गई तो फिर आखिर भाजपा क्यों हारी?
राम मंदिर की प्राण-प्रतिष्ठा दुनियाभर में सुर्खियां बनीं। 500 साल पुराना इतिहास बदला गया। पीएम मोदी खुद यहां रोड-शो करने आए। योगी ने 5 जनसभाएं कीं। मगर सियासी जादू नहीं चला। यहां जनता की नाराजगी अंदर ही अंदर मुखर हो रही थी। प्रधानमंत्री मोदी को यहां के भाजपा नेता गुड मैनेजमेंट दिखाते रहे। मगर अंदरखाने में कुछ और ही चल रहा था। विरोध की यह चिंगारी कैंडिडेट के फाइनल होते ही शुरू हो गई थी। आखिर क्या वजह थी जो बीजेपी को ले डूबी. जनता की बातों को अनसुना करना, बीजेपी प्रत्याशी लल्लू सिंह का अभिमान उनको ले डूबा. 2019 के चुनाव में जब लल्लू सिंह जीते तो लोगों से यही कहते सुने गए कि आप लोगों ने मोदी को वोट दिया मुझे नहीं.
अयोध्या में 14 किलोमीटर लंबा रामपथ बनाया गया। इसके अलावा भक्ति पथ और रामजन्मभूमि पथ भी बना। ऐसे में इसकी जद में आने वाले घर और दुकानें टूटीं लेकिन मुआवजा सभी को नहीं मिल सका।. जब स्थानीय जनता अपने जनप्रतिनिधी लल्लू सिंह के पास जाती थी तो कहते थे यह मामला सरकार का है. वही लल्लू सिंह का संविधान को लेकर दिया गया उनका बयान भारी पड़ गया। लल्लू सिंह वही नेता हैं, जिन्होंने कहा था कि मोदी सरकार को 400 सीट इसलिए चाहिए क्योंकि संविधान बदलना है। उनके इस बयान का खामियाजा बीजेपी को भुगतना पड़ा। अयोध्या में बीजेपी को अपने नेताओं की बयानबाजी और प्रोपेगंडा भी भारी पड़ा। जनता के बीच ये मैसेज गया कि बीजेपी आरक्षण को खत्म कर देगी। संविधान को बदल देगी। ऐसे में वोटरों का एक बड़ा तबका सपा की ओर चला गया। जहां अयोध्या के दलितों में बीजेपी को लेकर नाराजगी थी, वहीं कांग्रेस के लिए एक सॉफ्ट कॉर्नर भी था। जिसका असर चुनावों में देखने को मिला।