साल 2023 का अंत 4 राज्यों के भाग्य का फैसला करने जा रहा है। चुनावी पंडित अभी से चुनावों को लेकर अपने सटीक विश्लेषण की गोटिया चुनावी बिसात पर फेंक रहे हैं। लेकिन क्या ये विधान सभा चुनाव 3 बड़े नेताओं का राजनीतिक जीवन खत्म करने वाले है। जिसमें पहले नाम आता है राजस्थान की 2 बार मुख्य मंत्री रही वसुंधरा राजे (Vasundhara Raje) का। फिर आता है मध्य प्रदेश के दिलों पर मामा बन कर राज करने वाले शिवराज सिंह चौहान (Shivraj Singh Chouhan) का और आखिरी नाम आता है कांग्रेस छोड़ कर बीजेपी में शामिल हुए ज्योतिरादित्य सिंधिया (Jyotiraditya Scindia)।
कहा जाता है धोभी का कुत्ता ना घर का ना घाट का और ये कहावत चरितार्थ होती है ज्योतिरादित्य सिंधिया पर। कांग्रेस (Congress) छोड़ कर बीजेपी (BJP) में शामिल हुए सिंधिया को पार्टी ने CM रेस से बाहर कर दिया है।
देश के चार राज्यों में चुनाव होने वाले है। इसमें से सबसे ज्यादा महत्वपूर्ण राजस्थान (Rajasthan) और मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) है। जहां इस बार विधानसभा चुनाव (VidhanSabha Chunav) में यदि भारतीय जनता पार्टी की जीत होती है तो वहां आपको मुख्यमंत्री के रूप में नया चेहरा देखने को मिलेगा, क्योंकि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Narendra Modi) और अमित शाह (Amit Shah) पार्टी राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा (JP Nadda) की तिकड़ी राजस्थान में वसुंधरा राजे और मध्य प्रदेश में शिवराज सिंह चौहान एवं ज्योतिरादित्य सिंधिया को मुख्यमंत्री बनाने के मानस में नहीं है।
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एक रणनीति के तहत देश के चार राज्यों में होने वाले आगामी विधानसभा चुनाव देखते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अमित शाह और जेपी नड्डा इन दिनों लगातार चुनावी सभाएं और रैलियां करने में जुटे है। अब आप कयास लगाएंगे आखिर वो रणनीति क्या है?
बीजेपी के केंद्रीय चुनाव समिति के सूत्रों के अनुसार इन तीनों वरिष्ठ नेताओं की टिप्पणी सिर्फ और सिर्फ इन राज्यों में चुनाव जीतने के लिए वसुंधरा राजे, शिवराज सिंह चौहान और ज्योतिरादित्य सिंधिया का बहुत ही सफलतापूर्वक प्रयोग करने में लगी है।
केंद्रीय चुनाव समिति सूत्रों के अनुसार, प्रधानमंत्री गृहमंत्री और पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष तीनों ही नेता इन दोनों राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से मिले दिशा निर्देश के अनुसार चुनावी रणनीति बनाकर कार्य कर रहे हैं।
गौरतलब है कि राजस्थान में दो बार मुख्यमंत्री रह चुकी वसुंधरा राजे की राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से हमेशा ही अनबन रही है। राजे और आरएसएस (RSS) की यह कटुता राजे के लिए बहुत बड़ी मुसीबत बन चुकी है, पर केंद्र सरकार की यह तिकड़ी मध्य प्रदेश और राजस्थान की आम जनता की भावनाएं राजस्थान में वसुंधरा राजे, मध्यप्रदेश में शिवराज सिंह चौहान और ज्योतिरादित्य सिंधिया के नाम पर भुनाने में लगी हुई है।
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आपको बता दे भारतीय जनता पार्टी की केंद्रीय चुनाव समिति के सूत्रों ने बताया कि विशेष तौर से राजस्थान में वसुंधरा राजे की लोकप्रियता को देखते हुए पार्टी यह नहीं चाहती कि एकदम से राजे को चुनाव से बेदखल कर दिया जाए और राजे के विरोधियों में से किसी को मुख्यमंत्री का चेहरा बना दिया जाए।
सूत्रों ने बताया कि मध्य प्रदेश में भी नया प्रयोग करते हुए वर्तमान में केंद्रीय मंत्री और सांसदों को इस बार विधायक का टिकट दिया गया है और इन्हीं चेहरों में से किसी एक को मुख्यमंत्री का चेहरा बनाया जाएगा ।
ठीक इसी प्रकार 10 अक्टूबर के बाद जारी होने वाली राजस्थान की विधानसभा सीटों पर उम्मीदवारों की सूची में कुछ केंद्रीय मंत्री और सांसदों को विधायकों का टिकट दिया जाएगा। उन्हीं में से जीतने वाले विधायक को केंद्रीय चुनाव समिति की सहमति से मुख्यमंत्री का चेहरा बनाया जाएगा।