द नगरी न्यूज़ डेस्क : पीएम मोदी का भरोसा जीतते हुए ओम बिरला दूसरी बार लोकसभा के स्पीकर बन चुके हैं, जो इस बात का संकेत हैं की आने वाले समय में ओम बिरला राजस्थान की राजनीति के पावर सेंटर भी बनते हुए नजर आ रहे हैं, ऐसे में अब बीजेपी से दो बार मुख्यमंत्री रही वसुंधरा राजे बैकफुट पर होती नजर आ रही है, ऐसे में अब बीजेपी की कद्दावर नेता वसुंधरा राजे का अगला कदम क्या रहने वाला है इस पर आज हम चर्चा करेंगे।
ओम बिरला का दूसरी बार लोकसभा अध्यक्ष बनना राजस्थान की राजनीति में बदलाव होने के संकेत दे रहा है। लोकसभा चुनाव में बीजेपी राजस्थान में 11 सीट बचाने में नाकामयाब रही। लोकसभा चुनाव में बीजेपी और मोदी का जादू नहीं चला। तमाम दिग्गज नेताओं की हालत खराब हो गई थी। कई दिग्गज नेताओं की साख भी दांव पर लगीं हुई थी। आपको बता दें कि मोदी सरकार 3.0 में कोटा सांसद ओम बिरला लोकसभा अध्यक्ष चुन लिए गए हैं। बिड़ला का लगातार दूसरी बार इस पद पर काबिज होना राजस्थान में बदलाव की राजनीति की तरफ इशारा कर रहा है। हाल फिलहाल राजस्थान में अब एक पावर सेंटर बतौर मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा हैं। इससे अलग लोकसभा अध्यक्ष बिरला प्रदेश में नए पावर सेंटर के रूप देखे जा रहे हैं। आपको बता दें कि बिरला की गिनती मोदी-शाह के नजदीकी नेताओं में होती है। दरअसल, राजस्थान की राजनीति में पूर्व सीएम वसुंधरा को नजरअंदाज करने का दौर लगातार चल रहा है। वसुंधरा राजे को विधानसभा चुनाव से पहले मुख्यमंत्री फेस भी घोषित नहीं किया गया था। इतना ही नहीं वसुंधरा के बेटे दुष्यंत सिंह को मोदी कैबिनेट में जगह भी नहीं मिली है। लगातार नजरअंदाज किए जाने का दर्द पिछले दिनों एक कार्यक्रम के दौरान पूर्व सीएम वसुंधरा की जुबान पर भी आ गया, और उन्होंने उदयपुर में आयोजित सम्मेलन में कहा कि अब वह वफा का दौर नहीं रहा है। आज तो लोग उसी अंगुली को पहले काटने का प्रयास करते हैं। जिसको पकड़ कर वह चलना सीखते हैं। वसुंधरा राजे के इस बयान से साफ जाहिर है कि राजे पार्टी के अंदर लगातार हो रही अपनी अनदेखी से नाराज हैं। आपको बता दें कि वसुंधरा राजे विधानसभा चुनाव के बाद से ही प्रदेश में ज्यादा सक्रिय नहीं हैं। ऐसे में राजनीतिक जानकारों का कहना है कि विधानसभा चुनाव के बाद से राजे का कोई भी राजनीतिक बयान सामने नहीं आया था। लेकिन लंबे समय बाद अब राजे ने चुप्पी तोड़ी है। इस बयान के जरिए राजे उनके संरक्षण में आगे बढ़ने वाले नेताओं को निशाने पर लिया है… वहीं राजस्थान के सियासी जानकारों का कहना है कि लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला भी कभी वसुंधरा राजे के नजदीकियों में हुआ करते थे। इन्हीं नजदीकियों के चलते पहली बार विधायक बनने पर ही बिरला वसुंधरा सरकार में संसदीय सचिव बनने में सफल रहे। इससे बाद ओम बिरला रुकने वाले नहीं थे, जल्द ही बिरला ने दिल्ली में बेहतर संबंधों के आधार पर अपना अलग वजूद बना लिया, और 2023 में वसुंधरा के मुकाबले मुख्यमंत्री पद के दावेदारों में गिने जाने लगे। अब वे प्रदेश के राजनीति में वसुंधरा के बराबरी में आकर खड़े हो गए हैं। और वे एक नए पावर सेंटर बनकर उभरे हैं। सियासी जानकारों का कहना है कि मोदी और अमित शाह राजस्थान को ओम बिरला के हवाले कर सकते है। बड़ा सवाल यहीं है कि मोदी और अमित शाह वसुंधरा राजे को हाशिए पर भेजकर क्या संदेश देना चाहते हैं? जानकारों के मुताबिक वसुंधरा राजे सार्वजनिक मंच पर भी किसी के सामने झुकने का संकेत नहीं देती। ऐसे में आने वाले समय में राजनीति में वसुंधरा राजे की आंधी कुछ नया भूचाल खड़ा करेगी या यूं कहें की क्या सच में राजनीति के एक युग का अंत हो चुका है....