96 साल की पुरानी संसद को विदाई देते हुए और अच्छाई एवं हर बुराई को वहीं छोड़ते हुए देश के सांसदों ने नई संसद में एक नेक इरादे के साथ प्रवेश किया ही था कि हमारे एक सांसद ने ऐसे अमर्यादित, असभ्य और बेहुदे आचरण का प्रदर्शन किया। जिससे हमारी नई संसद की ही नहीं, बल्कि पुरे देश की बदनामी इस तरह से हुई है जिसके लिए कोई माफ़ी नहीं हो सकती, फिर चाहे उन्हें कितनी ही कड़ी सजा क्यों ना मिले। पीढ़ियां याद रखेगी कि हमारे सांसद ने किस तरह के शब्दों का इस्तेमाल किया है,जिन्हें हमें भी बोलते हुए शर्म महसूस हो रही है।
जब देश के सांसद पुरानी संसद से नई संसद में प्रवेश किया और एक नई शुरुआत की। इस दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने उम्मीद की होगी कि हम सब पुरानी कड़वाहट को भुलाकर एक नया आगाज़ करेंगे और देश के प्रति हमारा समर्पण ही हमारा सबसे बड़ा ध्येय होगा।
लेकिन किसे उम्मीद थी कि वक़्त का तकाजा उन पर ही सबसे पहले भारी पड़ेगा। हम यह क्यों कह रहे हैं ये आपको आगे धीरे-धीरे समझ आएगा। सोशल मीडिया पर एक वायरल विडियो दक्षिणी दिल्ली से लोकसभा सांसद रमेश बिधूड़ी का है, क्योंकि इसमें बोले गए शब्द ऐसे हैं जिन्हें सुनकर शर्म महसूस होती है कि हम हमारे पवित्र स्थल संसद में कैसे सांसदों का चयन करते हैं।
वैसे, अब तक आप सब ने ये विडियो देख ही लिया होगा, यदि नहीं भी देखा है तो आपको यह विडियो सोशल मीडिया पर मिल जाएगा। जिसे आपको एक बार ज़रूर देखना और सुनना चाहिए। जिससे आप सब को पता चले कि हमें कैसे नेताओं का चयन करना है।
आगे हम इस मसले पर और बात करें, लेकिन उससे पहले आपको ये पूरा मामला बता देते हैं। G-20 की शानदार सफलता के बाद केंद्र सरकार द्वारा अचानक से संसद का एक स्पेशल सेशन बुलाया गया। जहां देश की पुरानी संसद से नई संसद में भी प्रवेश किया गया और वो भी गणेश चतुर्थी के दिन। अब हम यहां गणेश जी का जिक्र क्यों कर रहे हैं ये भी आपको बता देते हैं। कहा जाता है कि जब हम नई शुरुआत करते हैं तो सबसे पहले भगवान् गणेश जी की पूजा करते हैं ताकि हमें हमारे काम में सफलता मिलें। हम अच्छे से काम कर सकें और अच्छा व्यवहार भी करना सीखें।
इसी स्पेशल सेशन के दौरान भारतीय जनता पार्टी के लोकसभा सांसद रमेश बिधूड़ी ने बसपा सांसद दानिश अली पर आपत्तिजनक शब्दों का इस्तेमाल करते हुए “बाहर देख लेने की” धमकी तक दे डाली। जब बिधूड़ी इन आपत्तिजनक शब्दों का इस्तेमाल कर रहे थे तब पीछे बैठे सीनियर उन्हें टोकने की बजाय हंसते नजर आ रहे थे। हम फिलहाल के लिए उन हंसते हुए नेताओं का नाम लेना भी मुनासिब नहीं समझ रहे हैं, क्योंकि ये उनके सोचने का वक़्त है कि उन्हें उस वक़्त हंसने की बजाय क्या करना चाहिए था।
रमेश बिधूड़ी के इस बयान के बाद ना सिर्फ सियासी गलियारों में भूचाल आया,बल्कि देश के आम लोग भी कहने लगे कि हमने एक नई शुरुआत की थी, एक नया अध्याय लिखने की कोशिश की थी, लेकिन शायद हमारे सांसद को ये सब मंजूर नहीं दिखता। वो नहीं चाहते कि देश एक नई शुरुआत करें। जहां हम सभ्य शब्दों का इस्तेमाल करें और हमारी आने वाली पीढ़ी के लिए एक अच्छा संदेश दें।
इस बवाल स्पीच के बाद भी लोकसभा स्पीकर की तरफ से तब तक कोई कार्यवाही नहीं हुई। जब तक हर तरफ से हंगामा ना मचा हो जबकि एक ज़िम्मेदारी बनती थी लोकसभा स्पीकर की, कि वे बिना हंगामा मचे ही इस स्पीच को बोलने वाले सांसद पर कड़ी कार्यवाही करते। हालांकि उन्होंने कार्यवाही की जहां लोकसभा स्पीकर ओम बिरला ने रमेश बिधूड़ी को चेतावनी देकर छोड़ दिया और कहा कि आगे से वे ऐसा कुछ बोलते हैं तो उन पर कड़ी कार्यवाही हो सकती हैं।
अब हम शुरू में वापस लौटते हैं कि हमने यहां प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का जिक्र क्यों कर रहे थे। रमेश बिधूड़ी के इस बयान पर खुद से कार्यवाही नहीं करते हुए भारी दवाब के बीच भारतीय जनता पार्टी ने सांसद को “कारण बताओ नोटिस” जारी किया। बाकी उस पर क्या कार्यवाही होती है यह आने वाले वक़्त बताएगा, लेकिन इस बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से एक सवाल बनता है कि उनकी पार्टी के एक सांसद ने संसद में जिस तरह के शब्दों का इस्तेमाल किया,,, क्या वे उस पर अपनी पार्टी की इस ढ़ीली कार्यवाही से संतुष्ट है और लोकसभा स्पीकर के निर्णय से भी ?,,, क्योंकि ये स्पीच रति भर भी ना संसदीय हो सकती है और ना ही मानवता के हित में, क्योंकि ये एक ऐसा भद्दा आचरण है। जिसे इतिहास हमेशा याद रखेगा, खासकर तब जब देश विश्व गुरु बनने के सपने देख रहा हो। हालांकि इस बीच हमारे सभी सांसदों को देश के प्रधानमंत्री के उस विडियो को हर एक दिन सुबह उठते ही सुनना चाहिए।
कहा जाता है कि सिर्फ कहने भर से एक नई शुरुआत नहीं हो जाती, बल्कि हमारा आचरण बताता है कि हम एक नई शुरुआत के काबिल है या नहीं। हमारी नई संसद के शुरू होने के चौथे दिन ही सांसद का हमें वो आचरण देखने को मिला। जिससे ना सिर्फ प्रधानमंत्री और देश के ख़्वाबों की नई संसद की बदनामी हुई है, बल्कि ये घटना एक ऐसा सबक भी सीखा गई कि हम 21 वीं के सदी के लोग है और दुनिया बहुत तगड़ी वाली तरक्की कर रही है। लेकिन हमें अभी भी हमारे आचरण पर बहुत ज्यादा, बहुत ज्यादा काम करने की ज़रुरत है।
कहते हैं कि किसी बड़े पद पर आसीन हो जाने से कोई इंसान सभ्य नहीं हो जाता। हमें हर चलते कदम के साथ उसके व्यवहार पर निगरानी रखनी होती है, ताकि हम देख सकें कि कहीं उस इंसान के कदम सभ्य दुनिया से तो नहीं भटक रहे हैं।
साथ ही अब वक़्त आ गया है कि इस बयान से हमारी नई संसद की जो बदनामी हुई है। उसे हम तभी हटा सकते हैं। जब हम भ्रष्ट आचरण के नेताओं को चुनने के बजाय उन नेताओं को चुने, जो आने वाली पीढ़ी के लिए ऐसे आचरण का प्रदर्शन करें। जिनके बारे में वो नाज से कह सकें कि देखो ये है हमारे बड़े-बुजुर्ग, जिन्होंने हमें एक बेहतर दुनिया दी और सभ्य दुनिया के उस आचरण की सीख भी जिसे हम देखकर बेझिझक सीख सकते हैं।