हमेशा एफिडेविट में अपनी अलग-अलग शिक्षा बताने के कारण मंत्री लालचंद कटारिया के शिक्षा से जुड़े झूठे एफिडेविट का मामला चुनाव आयोग तक पहुंच गया है। जिसमें झूठा शपथ-पत्र देने के मामले में कटारिया के खिलाफ सख्त एक्शन लेने की मांग की गई।
बता दें कि चुनाव आयोग के अलावा कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे, पूर्व अध्यक्ष सोनिया गांधी और राहुल गांधी को भी दस्तावेज भेजकर कटारिया पर एक्शन लेने की मांग की है।
दरअसल, राजस्थान सरकार में कृषि मंत्री लालचंद कटारिया का अपनी शिक्षा को लेकर चुनाव आयोग में झूठा शपथ-पत्र देने का मामला सामने आया है। कटारिया ने 2003 के विधानसभा चुनाव में आमेर सीट से भरे एफिडेविट में खुद को रायबरेली (यूपी) के इंटर कॉलेज से इंटरमीडिएट (12वीं) पास बताया, जबकि 2008 के विधानसभा चुनाव में झोटवाड़ा सीट से भरे एफिडेविट में उन्होंने खुद को 10वीं पास बताया।
चार चुनावों में उन्होंने शिक्षा को लेकर अलग-अलग ब्योरा दिया। जिसके बाद से लालचंद कटारिया की शिक्षा पर सवाल खड़े हो गए।
बता दें कि लालचंद कटारिया ने 2003 का विधानसभा चुनाव आमेर से लड़ा। उस वक्त उन्होंने अपनी शैक्षणिक योग्यता के कॉलम में 12वीं परीक्षा पास लिखा।
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उसके बाद 2008 में कटारिया ने झोटवाड़ा से कांग्रेस के टिकट पर चुनाव लड़ा। उस वक़्त उन्होंने अपनी शैक्षणिक योग्यता के कॉलम में 10वीं पास लिखा। फिर 2009 में जयपुर ग्रामीण से लोकसभा चुनाव में पेश एफिडेविट में भी कटारिया ने अपनी शैक्षणिक योग्यता के कॉलम में 10वीं पास लिखा।
तो वही पिछली बार 2018 का विधानसभा चुनाव लालचंद कटारिया ने झोटवाड़ा से लड़ा। जिसके एफिडेविट में कटारिया ने शैक्षणिक योग्यता के कॉलम में बदलाव करते हुए फिर से 12वीं पास लिखा।
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दरअसल, रायबरेली के जिस इंटर कॉलेज से लालचंद कटारिया ने 10वीं और 12वीं पास की। उसी कॉलेज ने दावा किया कि हमारे यहां लालचंद कटारिया नाम का कोई स्टूडेंट नहीं था। जिसके बाद से कटारिया की शिक्षा पर सवाल उठने लगे। श्री नर्मदेश्वर इंटरमीडिएट कॉलेज ने लालचंद कटारिया को संस्थान का स्टूडेंट बताने से साफ इनकार कर दिया। कॉलेज के प्रिंसिपल ने कटारिया को इस संस्थान से हाई स्कूल और इंटरमीडिएट पास करने के सवाल के जवाब में लिखा - लालचंद कटारिया ने श्री नर्मदेश्वर इंटर कॉलेज से कोई परीक्षा पास नहीं की है। लालचंद कटारिया का कोई भी विवरण स्कूल के संस्थान या व्यक्तिगत रिकॉर्ड में दर्ज नहीं है।
बता दे कि चुनाव लड़ते समय हर उम्मीदवार को अपनी शिक्षा, मुकदमों, प्रॉपर्टी, असेट एंड लायबिलिटी को लेकर एफिडेविट देना होता है और इन सब एफिडेविट में कटारिया ने अपनी शिक्षा अलग-अलग बताई। जिसके बाद से कटारिया की शिक्षा पर सवाल खड़े हो गए।