25 नवम्बर 2023 को होने वाले विधानसभा चुनाव अपने चरम पर है। चारों तरफ चुनावी संग्राम में हर इंसान की जुबान पर अपने-अपने नेताओं का नाम है तो नेताओं के दिमाग में सिर्फ और सिर्फ अपनी-अपनी राजनीति का खेल।
राजनीति की अगर बात की जाएं तो जहां राजनीति होती है वहां दो पार्टियों का सामना होता है। हर पार्टी अपनी पार्टी को ऊपर उठाने के लिए और आगे लाने के लिए विरोधी पार्टी पर राजनीति तंज कसती है और मानसिक दवाब बनाते हुए वोट काटने का काम करती है। मानसिक दवाब कई तरह से बनाए जाते हैं। सियासी खेल में दवाब चारों तरफ से होता है। पार्टी के सामने अपना मजबूत प्रत्याशी चुनना और खड़ा करना ये सबसे बड़ा काम है। अपने मजबूत प्रत्याशी के नाम का पार्टी किस तरह से उपयोग करती है और विपक्षी पार्टी को कमजोर करती है। ये सत्ता के लिए राजनीति है।
राजस्थान में बीजेपी की तरफ से अभी तक मुख्यमंत्री का चेहरा सामने नहीं आया है। इससे क्या राजस्थान विधानसभा चुनाव में भाजपा को बड़ा झटका लगेगा। वसुंधरा राजे को नज़रंदाज़ करना, भाजपा को भारी पड़ने वाला है। भाजपा ऐसा करके क्या संदेश देना चाहती है। प्रधानमंत्री मोदी के चेहरे पर चुनाव लड़ा जाएगा। भाजपा का कही ये कोई बड़ा दांव तो नहीं। भाजपा में मुख्यमंत्री के चेहरे को लेकर खींचतान चल रही है। वहीं कांग्रेस की बात करें तो मुख्यमंत्री का चेहरा अशोक गहलोत ही है। बात करे सचिन पायलट की तो 3 साल पहले अपनी ही सरकार के खिलाफ संघर्ष करते नज़र आ रहे थे लेकिन अब सचिन पायलट अपनी अशोक गहलोत से लड़ाई को भूलकर पार्टी के लिए अपनी पारंपरिक सीट से ही चुनाव लड़ रहे हैं।
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वसुंधरा राजे का मुख्यमंत्री पद के लिए नाम ना आने पर भाजपा की तरफ से अभी तक कोई प्रतिक्रिया नहीं आई है। वहीं कांग्रेस की तरफ से सचिन पायलट की बात करें तो उनको अभी तक फ्रंट में नहीं रखा गया है तो ऐसे में सवाल है कि वसुंधरा का सीएम पद के लिए ना होना क्या 25–30 सीटों का भाजपा का नुकसान होना है। तो कांग्रेस का सचिन पायलट को आगे ना लाना भी काग्रेस के लिए 12 से 15 सीटों का नुकसान हो सकता है। हालाकि, फिर भी सचिन पायलट को अभी तक मंच पर आगे देखा गया है। लेकिन कांग्रेस की राजनीति में सचिन पायलट को लगातार पीछे ही धकेला जा रहा है।
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एक तरफ जहां पायलट के साथ युवाओं का समर्थन है तो वहीं वसुंधरा की राजनीति और सहयोग नेताओं का जोश है। राजस्थान में होने वाले चुनाव जो 25 नवम्बर 2023 को होने हैं। अभी तक के चुनावी प्रचार में सचिन पायलट का मंच पर कांग्रेसी नेताओं ने काफी साथ दिया है, लेकिन अंदुरनी राजनीति में पायलट का बायकाट किया गया है। सीएम गहलोत और पायलट की आपसी नाराजगी का फायदा वसुंधरा राजे को मिलेगा या सीएम के लिए वसुंधरा का नाम नहीं होना कांग्रेस के लिए फायदेमंद होगा। ये 25 नवम्बर 2023 को होने वाले चुनावों के नतीजों के आने के बाद ही पता चलेगा।