जयपुर (संदीप अग्रवाल): प्रदेश में चुनाव के बाद कांग्रेस को जिस तरह से हार का मुंह देखना पड़ा उससे पार्टी बड़े सदमें में है। अब पार्टी के कद्दावर नेता हार का ठीकरा एक दूसरे के माथे पर फोड़ते नजर आ रहे है। ऐसे में मंगलवार, यानी आज प्रस्तावित कांग्रेस दल की बैठक (Congress Prty Meeting) जो कि प्रदेश कांग्रेस कार्यालय (State Congress Office) में होनी है। कयास ये लगाए जा रहे है कि पार्टी की बैठक में आज एक बार फिर गहलोत -पायलट गुट आमने सामने हा सकते है। ये बात अलग है कि बैठक में कांग्रेसी विधायकों के साथ पीसीसी (PCC) चीफ गोविंद सिंह डोटासरा (GOVIND SINGH DOTASARA) और प्रदेश प्रभारी सुखजिंदर सिंह रंधावा (SUKHJINDRA SINGH RANDHWA) के साथ संगठन के पदाधिकारी भी मौजूद रहेंगे। बैठक में हार के जिम्मेदार नेता निशाने पर होंगे।
वैसे कहने को तो कांग्रेस में किसी प्रकार की गुटबाजी नहीं है। क्योंकि पार्टी के कद्दावर नेता लगातार पार्टी के एकजुट होने के दावें करते नजर आ रहे है। पिछले दिनों राहुल गांधी (RAHUL GANDHI) द्वारा पूरे भारतवर्ष में निकाली गई भारत जोड़ो यात्रा (BHARAT JODO YATRA) के दौरान भी राहुल ने गहलोत पायलट को एक मंच पर तो खडा कर दिया था किंतु उसके बाद भी दोनो के दिलों में मनमुटाव खत्म नहीं हुआ था। इसी बीच 2020 में मानेसर के होटलों में पायलट गुट के विधायकों की बाडेबंदी (BARRICADE OF MLAS) भी किसी से छुपी हुई नहीं है। ये वो समय था जब पायलट आपने समर्थक करीब 19 विधायकों को लेकर मानेसर (MANESAR) के एक फाइवस्टार होटल (FIVE STAR HOTEL) में ठहरे थे और सरकार गिराने में कोई कसर नहीं छोड़ी थी। उस समय गहलोत के पास केवल 107 विधायक ही बचे थे। ऐसे में उस समय पूरे देश की नजरें राजस्थान की राजनीति (POLITICS OF RAJASTHAN) पर ही टीकी थी। देश के लोगों के लिए वह समय राजस्थान की राजनीति मनोरंजन का केंद्र बिंदू था। ऐसे में उस समय का हाई वोल्टेज ड्रॉमा (BHIGH VOLTAGE DRAMA) जग जाहिर है।
अभी अभी ताजा ही कांग्रेस ने राजस्थान में करारी हार का सामना किया है। अब हार पार्टी के नेताओं के पचने में नहीं आ रही है। इसी को लेकर मंगलवार को प्रदेश कांग्रेस कार्यालय में विधायक दल की बैठक होनी है। इस बैठक में कांग्रेसी विधायकों के साथ पीसीसी चीफ गोविंद सिंह डोटासरा (PCC Chief Govind Singh Dotasara) और प्रदेश प्रभारी सुखजिंदर सिंह रंधावा (State in-charge Sukhjinder Singh Randhawa) के साथ संगठन के पदाधिकारी भी मौजूद रहेंगे। बैठक में कांग्रेस की हार का ठीकरा एक दूसरे पर फोड़ने के लिए तकरार होना लाजमी है। प्रदेश कांग्रेस में अशोक गहलोत गुट और सचिन पायलट गुट के बीच लंबे समय तक खींचतान चली थी। ऐसे में हार का ठीकरा एक दूसरे के सिर पर फोड़ने के लिए कई विधायक उतावले हो रहे हैं।
कांग्रेस विधायक दल (Congress Legislature Party) की बैठक पर सबकी निगाहें टिकी है। इस बैठक में हार की करारी हार का मसला छाए रहने की पूर्ण संभावना है। बैठक के दौरान चुनाव में हुए भितरघात का मुद्दा भी उठेगा। कांग्रेस की हार के लिए जिम्मेदार नेता कई वरिष्ठ नेताओं के निशाने पर रहेंगे। चूंकि प्रदेश में अशोक गहलोत (ASHOK GEHLOT) के चेहरे पर चुनाव लड़ा गया था। उनकी योजनाओं और कांग्रेस की गारंटियों के साथ अशोक गहलोत की तस्वीर प्रमुखता से प्रकाशित की गई। ऐसे में गहलोत गुट सचिन पायलट गुट के निशाने पर रह सकता है।
राजनीति के जानकार और विश्लेषक कांग्रेस की हार का सबसे बडा कारण गहलोत पायलट गुट में 2020 में हुई तकरार और बाद में 2023 में पायलट द्वारा अपनी ही पार्टी के खिलाफ जार आमरण अनशन करना और अजमेर से लेकर जयपुर तक जन संघर्ष पदयात्रा (Jan Sangharsh Padyatra) निकालना मान रहे है। ऐसा माना जा रहा है कि कांग्रेस की हार का एक बड़ा कारण अशोक गहलोत और सचिन पायलट के बीच चला सियासी युद्ध (political war) है। राजस्थान में पिछले चार साल तक दोनों के बीच संघर्ष चलता रहा। पायलट तो गहलोत के खिलाफ अनशन और आंदोलन तक कर चुके। कांग्रेस हाईकमान बार बार दोनों में सुलह कराता रहा लेकिन दोनों के मन कभी नहीं मिले। चुनाव प्रचार के दौरान एक भी सभा में अशोक गहलोत और सचिन पायलट एक साथ नजर नहीं आए। हार के बाद अब दोनों गुटों में फिर से खींचतान होना तय माना जा रहा है।
टोंक में मीडिया से रूबरू होते हुए सचिन पायलट कह चुके हैं कि सत्ता में रहकर हम बार बार क्यों हार रहे हैं। इस पर हाई लेवल को मंथन करना चाहिए। पायलट ने कहा कि हम लोग चाहते थे कि सरकार दोबारा बने, इसके लिए सब लोगों ने जितना हो सका पूरी ताकत लगाकर काम किया था, बावजूद इसके भी हम कामयाब नहीं हो सके। इसके कारणों को तलाशना होगा। जिस परंपरा को तोड़ने के लिए हमने बहुत मेहनत की।