राजस्थान में ऐसे कई नेता रहे हैं जिन्होंने सालों-साल अपने सामने आने वाले हर प्रतिद्वंद्वी को धूल चटाई है। इन नेताओं का कद इतना बड़ा रहा है कि दशकों तक कोई भी विपक्षी नेता इन्हें हरा नहीं पाया।
आज हम आपको उन दिग्गज नेताओं के बारे में बताएंगे जिनके सामने प्रतिद्वंद्वी भी चुनाव लड़ने से घबराते थे। सबसे ज्यादा 10 बार विधायक बनने का रिकॉर्ड पूर्व मुख्यमंत्री हरिदेव जोशी और भैरोंसिंह शेखावत का रहा है।
राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री हरिदेव जोशी सबसे ज्यादा बार विधायक बनने वाले नेता रहे हैं। वे पहली विधानसभा से लेकर 10वीं विधानसभा तक लगातार विधायक चुने गए। बता दें कि ऐसा करने वाले जोशी पहले और अब तक के एकमात्र विधायक हैं। 1952 में हुए पहले विधानसभा चुनाव में डूंगरपुर से जोशी विधायक बने। इसके बाद उन्होंने 1957 और 1962 में घाटोल सीट से चुनाव जीता।
1967 से लेकर 1993 तक हरिदेव जोशी लगातार बांसवाड़ा सीट से विधायक चुने गए। बता दें कि जोशी लगातार 10 बार विधायक चुने गए। इस दौरान वे तीन बार प्रदेश के मुख्यमंत्री भी रहे। जोशी 1973 से 1977, 1985 से 1988 और 1989 से 1990 तक मुख्यमंत्री रहे।
पूर्व मुख्यमंत्री हरिदेव जोशी के बाद बात करते हैं भैरोंसिंह शेखावत के बारे में।
बता दें भैरोंसिंह शेखावत हरिदेव जोशी के साथ के उन चुनिंदा दो नेताओं में से हैं। जिन्होंने 10 बार विधानसभा चुनाव जीता है। भैरोसिंह शेखावत 1952 से लेकर 1967 और फिर 1977 से लेकर 1998 तक लगातार विधायक चुने गए। इस दौरान शेखावत ने 10 बार चुनाव जीता है। शेखावत दांतारामगढ़, श्रीमाधोपुर, किशनपोल, छबड़ा, निम्बाहेड़ा, धौलपुर और बाली सीट से विधायक रहे हैं।
तो ये थे राजस्थान के वो दो दिग्गज, जिनके नाम 10 बार विधायक बनने का रिकॉर्ड दर्ज है।
अब बात करते हैं उन 10 नेताओं के बारे में जिनके सामने कोई नहीं टीक पाया और जिन्होंने राजनीति में 3 दशक तक राज किया।
सबसे पहले बात करते हैं खेतसिंह राठौड़ के बारे में। खेतसिंह राठौड़ 7 बार शेरगढ़ सीट से ही विधायक रहे हैं। उन्होंने 1952 में पहला चुनाव जीता था और अपना आखिरी चुनाव 2003 में लड़ा, जहां उन्हें हार का सामना करना पड़ा। इस दौरान खेतसिंह राठौड़ 1952, 1967, 1972, 1980, 1993 और 1998 तक विधायक के रूप में चुने गए। बता दें खेतसिंह राठौड़ राजस्थान सरकार में मंत्री भी रहे हैं।
प्रद्युमन सिंह वैश्य समाज से होकर राजनीति में बड़ी जगह बनाने वाले नेताओं में प्रद्युमन सिंह का नाम आता है। राजस्थान में प्रद्युमन सिंह आठ बार विधायक रहे हैं। धौलपुर की राजाखेड़ा सीट से 1967 में उन्होंने पहली बार चुनाव जीता। इसके बाद उन्होंने 2013 तक लगातार आठ चुनाव जीते। बता दें वर्तमान में उनके बेटे रोहित बोहरा राजाखेड़ा से विधायक हैं।
कमला बेनीवाल,कमला बेनीवाल ने 7 बार विधानसभा चुनाव जीते हैं। 1954 में चौमूं सीट पर उपचुनाव से अपने राजनीतिक करियर की शुरुआत की थी। बता दें कमला राजस्थान की पहली महिला मंत्री के रूप में भी जानी जाती हैं। कमला बेनीवाल 27 साल की उम्र वाली सबसे कम उम्र की महिला थी जो मंत्री बनी थी। 1998 में गहलोत सरकार में वे उपमुख्यमंत्री के पद पर भी रहीं हैं।
अब्दुल हादी अब्दुल हादी ने अपना पहला चुनाव 1953 में लड़ा था। इसके बाद उन्होंने 1967, 1972, 1977, 1985, 1990 और 1998 में चौहटन सीट से चुनाव लड़ा और जीत हासिल की। हादी उन चुनिंदा नेताओं में गिने जाते हैं जिन्होंने 7 बार विधानसभा चुनाव जीता है।
गुलाबचंद कटारिया ने अपना पहला चुनाव 1977 में उदयपुर से जीता। इसके बाद उन्होंने 2018 तक लगातार उदयपुर सीट से ही चुनाव जीता। फिलहाल गुलाबचंद कटारिया असम के राज्यपाल हैं।
गंगाराम चौधरी ने बाड़मेर, गुढ़ामलानी और चौहटन जैसी सीटों से चुनाव लड़ा है। उन्होंने 1962 से 1977 तक चार चुनाव गुढ़ामलानी सीट से जीते। वहीं 1985 से लेकर 1993 तक के तीन चुनावों में उन्होंने बाड़मेर से जीत दर्ज की और अपना आखिरी चुनाव उन्होंने 2003 में चौहटन सीट से लड़कर जीत हासिल की। खास बात यह रही कि उन्होंने एक पार्टी नहीं, बल्कि कांग्रेस, लोकदल, जनता दल और भाजपा जैसी अलग-अलग पार्टियों से चुनाव लड़ा और जीते।
शीशराम ओला शेखावाटी प्रमुख जाट नेताओं में से एक हैं। वे एकमात्र ऐसे नेता हैं जो 8 बार विधायक और 5 बार सांसद रहे चुके हैं। शीशराम ओला 1957 से 1980, 1985 और 1993 में विधायक चुने गए। बता दें शीशराम ओला लोकसभा सांसद और केंद्रीय मंत्री भी रहे हैं।
चंदनमल बैद कांग्रेस के प्रमुख नेताओं में से एक है। उन्होंने 8 बार विधायक चुनाव लड़कर जीत हासिल की है। चंदनमल बैद ने सरदारशहर और तारानगर सीट से चुनाव लड़े हैं। बैद ने 1952, 1957, 1962 और 1972 का चुनाव सरदारशहर से जीता। इसके बाद उन्होंने 1980, 1990, 1993 और 1998 में तारानगर सीट से चुनाव जीते हैं। बता दें हाल ही में डॉ. चंद्रशेखर बैद ने कांग्रेस छोड़ बीजेपी जॉइन कर ली है।
सुमित्रा सिंह राजस्थान के उन नेताओं में गिनी जाती हैं जो 9 बार विधायक रही हैं। सुमित्रा सिंह 1957 से 1977, 1985, 1990 ,1998 और 2003 तक कुल 9 बार विधायक चुनी गईं हैं। सुमित्रा सिंह झुंझुनूं और पिलानी सीट से विधायक रही हैं। बता दें सुमित्रा सिंह राजस्थान की एकमात्र महिला स्पीकर भी रही हैं और उन नेताओं में गिनी जाती हैं। जिन्होंने बीजेपी और कांग्रेस दोनों पार्टियों से चुनाव लड़ा है।
परसराम मदेरणा राजस्थान के उन प्रमुख चेहरों में गिने जाते हैं, जिनका राजस्थान की राजनीति पर बड़ा प्रभाव रहा है। मदेरणा 9 बार विधायक चुने गए। वे 1957 से 1980 तक और 1990 से 1998 तक विधायक रहे हैं। इसके अलावा वे राजस्थान विधानसभा के अध्यक्ष और राजस्थान प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष भी रहे हैं।
तो ये थे राजस्थान की राजनीति, वो 10 नेता जिन्होंने राजनीतिक जीवन में अपनी एक अलग पहचान बनाई और लगातार 7 से 8 बार जीत अपने नाम की। हमारी इस राजनीतिक कहानी में अभी के लिए इतना ही। अगली बार फिर मिलेंगे राजनीति से जुड़ी एक दिलचस्प कहानी के साथ।