मृत्यु के कारणों का चिकित्सकीय प्रमाण पत्र (एमसीसीडी) विषय पर स्वास्थ्य भवन में 28 नवम्बर से चल रही दो दिवसीय बैठक में मृत्यु कारणों का प्रमाण पत्र में सही तरीके से अंकन, इसके महत्व सहित विभिन्न विषयों पर विस्तार से चर्चा की गई एवं विशेषज्ञों द्वारा आवश्यक सुझाव भी प्रस्तुत किये गये।
निदेशक जनस्वास्थ्य डॉ. रवि प्रकाश माथुर ने बताया कि एमसीसीडी पर अनुसंधान एवं गुणवत्ता सुधार हेतु भारत सरकार द्वारा 6 राज्यों में सेे राजस्थान को भी चयनित किया है। इस संबंध में शीघ्र ही मास्टर ट्रेनर्स का चयन कर उन्हें राज्य स्तर पर दक्ष प्रशिक्षकों से एक दिवसीय ट्रेनिंग करवाई जाएगी। उन्होंने बताया कि प्रशिक्षण के लिये आईसीएमआर और एम्स का सहयोग लिया जायेगा। आईसीएमआर बैंगलूरू की वैज्ञानिक डॉ. सुकन्या.आर ने चिकित्सकों द्वारा एमसीसीडी प्रमाण पत्र भरने में बरतने वाली सावधानियों के बारे में बताया। उन्होंने बताया कि मृत्यु के कारणों को रोगी की मेडिकल हिस्ट्री के आधार पर अस्पताल की टीम द्वारा निर्धारित कर भरा जाना चाहिए। यह आगामी अनुसंधान के परिणामों में भी सहायक सिद्ध होगा।
एम्स नई दिल्ली के एसोसिएट प्रोेफेसर डॉ. मोहन बैरवा ने प्रजेंटेशन के माध्यम से एमसीसीडी के बारे में विस्तार से चर्चा की उन्होंने बताया कि एमसीसीडी भरने के लिए आर्थिक एवं सांख्यिकी विभाग के सहयोग से पहचान पोर्टल को भी अद्यतन किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि एमसीसीडी में सुधार की दिशा में राजस्थान देशभर में अच्छा काम कर रहा है। उन्होंने चिकित्सकांे के लिये आईसीडी-10 का तकनीकी प्रशिक्षण कराने का सुझाव दिया।अति. निदेशक ग्रामीण स्वास्थ्य डॉ. प्रवीण असवाल ने जन्म-मृत्यु पंजीयन में गलत जानकारी पर एक्ट के तहत होने वाले जुर्माना आदि के बारे में जानकारी दी। बैठक में संयुक्त निदेशक चिकित्सा, मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी, प्रमुख चिकित्सा अधिकारी, प्रधानाचार्य मेडिकल कॉलेज, अधीक्षक मेडिकल कॉलेज, मेडिकल ज्यूरिस्ट तथा विभागीय अधिकारी उपस्थित रहेे। सांख्यिकी अधिकारी, जीवनांक एवं बैठक समन्वयक सत्य नारायण गुप्ता ने एमसीसीडी कोड की अब तक की प्रगति एवं अन्तर को तुलनात्मक रूप से अवगत कराया।