अरब वर्ल्ड के ज्यादातर देशों में रॉयल फैमिलीज़ के खिलाफ आवाज़ उठाने की इजाजत नहीं होती है, और अगर कोई भी गलती से आवाज़ उठा लेता है, तो उसे सजा-ए-मौत देदी जाती है,,,, UAE के रहने वाले निजाम नै भी कुछ ऐसा ही किया था, जिसकी वजह से उसे मौत के घाट उतार दिया जाता है, लेकिन हाल ही में वहां के ताजा मामले की बात करे तो आपको बता दें वहां के करीब 87 लोगों को कुछ इस तरह की हरकत करने के मामले में मौत की सजा तो नहीं सुनाई जाती है, पर उन लोगों को गिरफ्तार कर लिया जाता है.
UAE के UN एरिया में कुछ मानवाधिकार कार्यकर्ताओं ने इन 87 कैदियों की रिहाई के लिए विरोध प्रदर्शन किया था, दर्शन करने वालों पर तो दुनिया में फजीहत के डर से कोई कार्रवाई नहीं हुई, लेकिन जो लोग पहले से जेल में हैं, उन्हें बड़ी कीमत चुकानी पड़ी, बता दें ये विरोध प्रदर्शन तब हुआ जब दुबई में 1 और 2 दिसंबर को COP28 समिट का आयोजन किया गया था, इस समिट में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी समेत कई वर्ल्ड लीडर्स इस समिट में शामिल हुए थे, लेकिन हाल ही में अबुधाबी में मानवाधिकारों यानी ह्यूमन राइट्स के लिए काम करने वाले संगठन ‘एमीरेट्स डिटेनीस एडवोकेसी सेंटर’ यानी (EDAC) के हवाले से वर्ल्ड मीडिया में खबर आती है, की उन 87 लोगों पर आतंकवाद के आरोप लगाएं गए और साथ ही उन्हें पोलिटिकल प्रिजनर के तौर पर जेल में रखा गया है.
रिपोर्ट्स के मुताबिक इन 87 कैदियों में से 43 कैदियों पर आतंकी संगठन बनाने, और 44 पर आतंकी संगठन की मदद करने के आरोप थे, यह जानकारी इंस्ताबुल में रह रहे ‘एमीरेट्स डिटेनीस एडवोकेसी सेंटर’ यानी (EDAC) के चीफ हमद अल शम्सी की ओर से दी गई है, शम्सी कहते हैं कि UAE में UAE94 नाम की एजेंसी है वो हर उस शख्स पर देश विरोधी साजिश के आरोप लगाती है जो वहां हुई किसी भी छोटी सी बात का विरोध करते हैं, वहां हर छोटी से बात को इतना बड़ा बना दिया जाता है कि वहां के लोगों को सजा-ए-मौत या फिर उम्र भर जेल में रहने की सजा सुना दी जाती है, जैसे की वो 87 लोग जिनके बारे में हमने आपको बताया, इस दौरान UAE सरकार जेल में बंद 87 लोगों को भी इसी तरह की कोई सजा सुनाई जा सकती हैं, बता दें इन 87 कैदियों का एक रूटीन ट्रायल 7 दिसंबर को हुआ था, और इसी तरह का एक ट्रायल 2013 में भी हुआ था.
आपकी जानकारी के लिए बता दें इन 87 कैदियों में अहमद मंसूर भी शामिल है, अहमद मंसूर एक अमीराती ब्लॉगर, मानवाधिकार और सुधार कार्यकर्ता हैं जिन्हें 2011 में मानहानि और राष्ट्राध्यक्षों के अपमान के आरोप में गिरफ्तार किया गया था, और 10 साल की सजा सुनाई गई थी, जैसा की हमने आपको बताया अरब वर्ल्ड के ज्यादातर देशों में राजशाही जिसे वहां की सरकार भी कहा जाता है, अगर उनके खिलाफ आवाज़ उठाई जाती है, तो उन्हें या तो सजा-ए-मौत या फिर ताउम्र जेल में रहने की सजा सुनाई दी जाती है.