राजस्थान विधानसभा ने बुधवार को राजस्थान माल और सेवा कर (संशोधन) विधेयक-2025 को ध्वनिमत से पारित कर दिया। उपमुख्यमंत्री दिया कुमारी ने विधेयक को सदन में प्रस्तुत किया, जिसके पश्चात सदन ने इसे ध्वनिमत से पारित कर दिया। उन्होंने कहा कि इस विधेयक के पारित होने से कर संग्रहण व्यवस्था में निरंतरता आएगी तथा राजस्व वृद्धि के साथ-साथ करदाताओं को भी राहत मिलेगी।
उपमुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार जनहित के कार्यों को समयबद्ध एवं प्रभावी रूप से संपादित करने के लिए पूर्ण रूप से प्रतिबद्ध है। उन्होंने बताया कि देश के यशस्वी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में वर्ष 2017 में वन नेशन, वन टैक्स की अवधारणा के तहत जीएसटी अधिनियम लागू किया गया था, जो आज़ादी के बाद “कर प्रणाली” में सबसे बड़ा सुधार है। उन्होंने कहा कि कर संग्रहण की यह व्यवस्था वर्ष से निरंतर जारी है और राजस्थान इसमें अपनी महत्वपूर्ण भागीदारी निभा रहा है। उन्होंने बताया कि करों में एकरूपता बनाए रखने के लिए केंद्रीय वित्त अधिनियम-2024 के अनुरूप राजस्थान माल और सेवा कर अधिनियम-2017 में संशोधन आवश्यक था। इस उद्देश्य से राजस्थान माल और सेवा कर (संशोधन) विधेयक-2025 लाया गया है।
• करदाताओं को राहत प्रदान करते हुए वित्तीय वर्ष 2017-18 से 2019-20 तक के लिए एमनेस्टी लाकर धारा 73 के तहत जारी डिमांड नोटिस के संबंध में ब्याज और जुर्माना माफ करने का प्रावधान किया गया है।
• करदाताओं को अपील के मामलों में राहत प्रदान करते हुए अपील के लिए आवश्यक जमा राशि की सीमा को 25 करोड़ से घटाकर 20 करोड़ किया गया है साथ ही अपील करने की समय-सीमा भी बढ़ाई गई है।
• करदाताओं को राहत प्रदान करते हुए वित्तीय वर्ष 2017-18 से 2020-21 के लिए आईटीसी का दावा करने की समय-सीमा बढ़ाई गई है।
• अपंजीकृत करदाताओं से ख़रीद करने वाले व्यक्तियों को इनवॉइस जारी करने और ITC का दावा करने के लिए समय प्रदान किया जाएगा।
उपमुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि सभी माननीय सदस्यों से प्राप्त सुझावों की समीक्षा कर उन्हें आगामी जीएसटी काउंसिल की बैठक में चर्चा हेतु प्रस्तुत किया जाएगा।
इससे पहले उपमुख्यमंत्री ने विधेयक को सदन में प्रस्तुत किया। सदन में विधेयक को जनमत जानने के लिए परिचालित करने के प्रस्ताव को अस्वीकार करते हुए विधेयक ध्वनिमत से पारित कर दिया गया।