केंद्र सरकार ने 'एक देश-एक चुनाव' के प्लान पर एक कदम और आगे बढ़ाते हुए अब उसे अमलीजामा पहनाने की तैयारी शुरू कर दी है। दरअसल केंद्र सरकार ने एक देश-एक चुनाव' के अध्ययन के लिए 8 सदस्यीय कमेटी का गठन किया था और इसकी अध्यक्षता पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद को सौंपी गई। ये कमेटी एक देश-एक चुनाव को लेकर काम करेगी। एक देश- एक चुनाव पर रामनाथ कोविंद कमेटी ने अब इस पर काम शुरू कर दिया है। जानकारी के मुताबिक, केंद्रीय कानून मंत्रालय के टॉप ऑफिसर्स ने पूर्व राष्ट्रपति कोविंद से मुलाकात कर उन्हें एक देश-एक चुनाव के मसले पर ब्रीफिंग दी है। केंद्रीय कानून सचिव और इस कमेटी के सचिव नितेन चंद्रा, विधायी सचिव रीता वशिष्ठ और अन्य ने भी कोविंद से इसे लेकर मुलाकात की।
अब समझ लेते है 'एक देश-एक चुनाव' है क्या तो 'एक देश-एक चुनाव' का मतलब है- देश के सभी चुनाव एक साथ है। यानी सभी लोकसभा और विधानसभा का चुनाव एक साथ आपको बता दे कि आजादी के बाद 1952, 1957, 1962 और 1967 में लोकसभा और विधानसभा के चुनाव एक साथ ही होते थे, लेकिन 1968 और 1969 में कई विधानसभाएं समय से पहले ही भंग कर दी गईं। उसके बाद 1970 में लोकसभा भी भंग कर दी गई। इस वजह से एक देश-एक चुनाव की परंपरा टूट गई, चलिये आपको बताते है कि इस मुद्दे पर राजनीतिक पार्टियों का रुख क्या है और राजनीतिक नेताओ ने क्या कहा एक देश-एक चुनाव के बारे में।
बीजेपी नेता और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने 'एक राष्ट्र-एक चुनाव' का समर्थन करते हुए कहा कि इससे लोकतंत्र की समृद्धि और उसकी स्थिरता सुनिश्चित होगी। उन्होंने इसे आज की आवश्यकता बताया और इसके लिए प्रधानमंत्री मोदी का आभार जताया। सीएम ने कहा कि देश में स्थिरता महत्वपूर्ण है। ऐसे ही लोकतांत्रिक व्यवस्था में सरकारों की स्थिरता के साथ-साथ विकास के लिए भी एक गतिमान सरकार चाहिए होती है। इस दृष्टि से 'वन नेशन-वन इलेक्शन' एक अभिनंदनीय प्रयास है।
कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने 'एक देश, एक चुनाव' के विचार को भारतीय संघ और इसके सभी राज्यों पर हमला करार दिया। उन्होंने कहा - इंडिया भारत है और यह राज्यों का संघ है। एक देश, एक चुनाव का विचार भारतीय संघ और इसके सभी राज्यों पर हमला है।
आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक और दिल्ली के सीएम अरविंद केजरीवाल ने कहा कि देश के लिए क्या जरूरी है, वन नेशन वन इलेक्शन या वन नेशन वन एजुकेशन (अमीर हो या गरीब, सबको एक जैसी अच्छी शिक्षा), वन नेशन वन इलाज (अमीर हो या गरीब, सबको एक जैसा अच्छा इलाज), आम आदमी को वन नेशन वन इलेक्शन से क्या मिलेगा।
समाजवादी पार्टी के प्रमुख और यूपी के पूर्व सीएम अखिलेश यादव ने कहा कि हर बड़े काम को करने से पहले एक प्रयोग किया जाता है। इसी बात के आधार पर हम ये सलाह दे रहे हैं कि एक देश, एक चुनाव करवाने से पहले बीजेपी सरकार, इस बार लोकसभा के साथ-साथ देश के सबसे अधिक लोकसभा व विधानसभा सीटों वाले राज्य उत्तर प्रदेश के लोकसभा-विधानसभा के चुनाव साथ कराके देख ले।
उन्होंने आगे कहा कि इससे एक तरफ चुनाव आयोग की क्षमता का भी परिणाम सामने आ जाएगा और जनमत का भी, साथ ही बीजेपी को ये भी पता चल जाएगा कि जनता किस तरह बीजेपी के खिलाफ आक्रोशित है और उसको सत्ता से हटाने के लिए कितनी उतावली है।
एआईएमआईएम चीफ असदुद्दीन औवेसी ने कहा कि स्पष्ट है कि सरकार पहले ही इसे आगे बढ़ाने का फैसला कर चुकी है। एक राष्ट्र एक चुनाव बहुदलीय संसदीय लोकतंत्र और संघवाद के लिए विनाशकारी होगा। आगामी राज्यों के चुनावों के कारण मोदी को गैस की कीमतें कम करनी पड़ीं। वह एक ऐसा परिदृश्य चाहते हैं, जहां अगर वह चुनाव जीतते हैं, तो अगले पांच साल बिना किसी जवाबदेही के जनविरोधी नीतियों को आगे बढ़ाने में बिताएं। ये प्रस्ताव अपने आप में संविधान की मूल भावना के खिलाफ है और संघवाद की मूल प्रकृति के खिलाफ है।
शिवसेना (उद्धव ठाकरे) की नेता प्रियंका चतुर्वेदी ने कहा कि एक राष्ट्र, एक चुनाव की संभावना तलाशने के लिए समिति गठित करने का केंद्र सरकार का कदम बेरोजगारी और महंगाई जैसे मुद्दों से ध्यान हटाने का प्रयास है। इस मुद्दे पर पर गौर करने वाली तीन रिपोर्ट में कहा गया है कि पांच संवैधानिक संशोधन, राज्य विधानसभाओं और संसद में तीन चौथाई बहुमत और ईवीएम व वीवीपैट के लिए 15,000 करोड़ रुपये के खर्च की आवश्यकता है। तो क्या नई कमेटी जरूरी है। आप किसे मूर्ख बनाने की कोशिश कर रहे हैं।
आपको बता दे कि एक देश एक चुनाव की चर्चा के बीच केंद्र सरकार ने संसद का पांच दिन विशेष सत्र बुलाया है और ये सत्र 18 सितंबर से शुरू होकर 22 सितंबर तक चलेगा। बता दे कि यह 17वीं लोकसभा का 13वां और राज्यसभा का 261वां सत्र होगा। इसमें 5 बैठकें होंगी। इस सत्र को लेकर कई अटकलें लगाई जा रही हैं। यह सत्र क्यों बुलाया गया है, लेकिन इसे लेकर सरकार की तरह से अभी कोई बयान नहीं आया है।