चुनाव प्रचार का आज आखिरी दिन है और जनता-जनार्दन का फैसला ही तय करेगा कि किसके सिर पर जीत का सेहरा बंधेगा। 25 नवम्बर 2023 को राजस्थान विधानसभा चुनाव होने जा रहे हैं। बात करें पार्टियों की तो सभी पार्टियां तो अपने-अपने उम्मीदवारों की जीत को निश्चित बता रही है, लेकिन जीत होगी और किस की हार ये तो चुनाव के नतीजे आने के बाद ही पता चलेगा, जहां पार्टियों के दावे फेल भी हो सकते और नहीं।
एक तरफ बीजेपी की बात करें तो वो सत्ता में आने के लिए राजस्थान में जगह-जगह रैलियां और रोड शो के माध्यम से प्रचार करने में अपनी पूरी ताकत झोंक रही हैं। जिसके लिए राजस्थान में बीजेपी की जीत के लिए खुद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, अमित शाह और योगी आदित्यनाथ सभाओं को सम्बोधित करते हुए बीजेपी के प्रत्याशियों का समर्थन कर रहे हैं।
अगर वहीं कांग्रेस की बात करें तो सत्ता में होने के बावजूद भी अपने प्रत्याशियों की जीत के लिए ज़बरदस्त जोर लगाना पड़ रहा है कि क्योंकि एक नारा कांग्रेस की खाल उधेड़ रहा है। जो राजस्थान की जनता लगा रही है कि “गहलोत तेरे से बैर नहीं, मंत्रियों की तुम्हारी खैर नहीं” प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृहमंत्री अमित शाह के लगातार प्रचार के बावजूद भी बीजेपी के तीन नेताओं की सीट दांव पर लगी है। जो फिलहाल लोकसभा सांसद भी है पहली विद्याधर नगर से खड़ी हुई दिया कुमारी, जो मुख्यमंत्री पद की बड़ी दावेदार बताई जा रही है।
जिनके सामने कांग्रेस के सीताराम अग्रवाल की चुनौती है, क्योकि इस बार सीताराम अग्रवाल के सामने कांग्रेस में इस बार विक्रम सिंह जैसा बागी नजर नहीं आया है जिसके चलते पिछली बार के बागीपन का फायदा उठाते हुए बीजेपी के नरपत सिंह राजवी ने यहां से जीत दर्ज की थी। बीजेपी की ए श्रेणी की ब्राह्मण-वैश्य-राजपूत बहुल सीट पर कांग्रेस के सीताराम, दीया कुमारी को कड़ी टक्कर दे रहे है। इस बीच बात करे कांग्रेस की तो 3 साल पहले अपनी पार्टी से ही संघर्ष से करते नजर आ रहे थे। सचिन पायलट 2023 के होने वाले चुनाव में वो अपनी पारंपरिक सीट से ही चुनाव लड़ते नजर आ रहे हैं। पायलट को युवाओं का भरपूर साथ मिल रहा है। पायलट की जीत के लिए उनके समर्थक आश्वस्थ है। इस वक्त टोंक में सचिन ऑटो-पायलट मोड पर है।
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अब वापस लौटते हैं बीजेपी की तरफ। बात करें झोटवाड़ा विधानसभा क्षेत्र की तो बीजेपी से सांसद रहे राज्यवर्धन सिंह राठौड को अपनी जीत के लिए जोर-आजमाइश करते देखा जा रहा है। उनको विपक्षी पार्टी से ज्यादा निर्दलीय उम्मीदवार आशुसिंह सुरपुरा से ज्यादा नुकसान होता नजर आ रहा है। झोटवाड़ा विधानसभा क्षेत्र से कांग्रेसी उम्मीदवार अभिषेक चौधरी है। चुनाव से पहले तक आसान लगने वाली ये सीट भी अब भाजपा के चुनौती बनती नजर आ रही है। अब बात करें बीजेपी के तीसरे सांसद किरोड़ी लाल मीणा की तो कांग्रेस सरकार ने उनको हराने के लिए सियासी कुंज भरी है। यहां बागी आशा मीणा भी मैदान में है। आशा ने चूंदड़ी फैला दी है, ओढ़ा दो या जला दो। ये इमोशनल ट्रम्प कार्ड आशा मीणा को मजबूत बना रहा है, लेकिन यहां भी कांटे की टक्कर होगी। इस पुरे चुनावी समीकरण को देखा जाए और बात की जाए तो 25 नवम्बर 2023 को राजस्थान विधानसभा चुनाव में बीजेपी के 3 सांसदों की सीट दांव पर लगी है। जो काफी जोर आजमाइश करते देखे जा रहे हैं।
यहां बात बीजेपी के तीन सांसदों की ही नहीं है। कांग्रेस पार्टी भी अपने ही मंत्रियों के चलते कड़ी चुनौती का सामना कर रहा है। कांग्रेस में एक नहीं, दो नहीं, बल्कि 5 मंत्री कांग्रेस की साख दांव पर लगाए बैठे हैं। जिनमें से 2 बुरी तरह से फंसे हैं वो है दौसा में मुरारीलाल और लालसोट में परसादी लाल मीणा। वहीं 2 मंत्री जीतते नजर आ रहे हैं लेकिन चुनौती इनके लिए भी बड़ी है। वो है जयपुर से प्रताप सिंह खाचरियावास और राजेंद्र यादव और जबकि ममता भूपेश को अपने क्षेत्र में ज़बरदस्त विरोध झेलना पड़ रहा है। अब इस पुरे चुनावी समीकरण का पता 3 दिसंबर को आने वाले नतीजों के बाद पता चलेगा कि किस नेता की साख दांव पर लगी या नहीं।
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