पिछले 10 सालों से मोदी फैक्टर पर चुनाव लड़ रही बीजेपी की मुश्किलें इस बार थोड़ी बढ़ती हुई नजर आ सकती है, राजस्थान की 25 में से 10 सीट हॉट सीट में बदल चुकी है, इनमें लोकसभा अध्यक्ष, एक पूर्व मुख्यमंत्री, केंद्रीय मंत्री, विपक्षी दल के प्रदेशाध्यक्ष, एक राजनीतिक दल के संयोजक की प्रतिष्ठा दांव पर लगी है, इसके साथ ही भाजपा और कांग्रेस के कई दिग्गजों की साख भी लोकसभा चुनावों में दांव पर लगी हुई है, चलिए आपको बताते हैं इन 10 हॉट सीटों का समीकरण
जालोर-सिरोही: इस सीट पर पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के बेटे वैभव गहलोत चुनाव लड़ रहे हैं। खुद गहलोत ने यहां प्रचार की कमान संभाली हुई है। वैभव 2019 में जोधपुर से सांसद का चुनाव हार गए थे, वहीं बीजेपी ने यहां से लुम्बाराम चौधरी पर दांव खेला है
सीकर: यह सीट कांग्रेस ने गठबंधन के लिए छोड़ी है। यहां पर सीपीआई के अमराराम चुनाव मैदान में है। कांग्रेस के प्रदेशाध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा की गठबंधन में बड़ी भूमिका रही थी। इस कारण डोटासरा के कंधे पर चुनाव जिताने की जिम्मेदारी भी है। तो वहीं भाजपा के सुमेदानंद सरस्वती भी इस सीट से काफी मजबूत नजर आ रहे हैं, जिससे यहां मुकाबला रोमांचक बन गया है
नागौर: राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी के संयोजक हनुमान बेनीवाल कांग्रेस से गठबंधन प्रत्याशी के तौर पर चुनाव मैदान में हैं। बेनीवाल 2019 में भाजपा गठबंधन प्रत्याशी के तौर पर सांसद चुने गए थे। इस सीट पर बेनीवाल के साथ-साथ कांग्रेस के चार विधायकों की भी प्रतिष्ठा जुड़ी हुई है। तो वहीं भाजपा ने आरएलपी से गठबंधन तोड़ते हुए कांग्रेस से बीजेपी में शामिल हुई ज्योति मिर्धा को नागौर सीट से टिकट दिया है
चूरू: शेखावाटी की सबसे हॉट सीट चूरू मानी जा रही है। यहां से कांग्रेस प्रत्याशी राहुल कस्वां हैं और पिछले दो चुनाव भाजपा के टिकट पर जीते थे, लेकिन इस बार कांग्रेस पार्टी से मैदान में है। उनका सीधा मुकाबला पैरालंपिक खिलाड़ी देवेंद्र झाझड़िया से है। इस सीट पर पूर्व नेता प्रतिपक्ष राजेन्द्र राठौड़ की साख भी जुड़ी हुई है।
जैसलमेर-बाड़मेर: यह सीट त्रिकोणीय मुकाबले में फंसे होने के कारण हॉट सीट बनी हुई है। यहां से केन्द्रीय मंत्री कैलाश चौधरी का मुकाबला कांग्रेस के उम्मेदाराम बेनीवाल से है, लेकिन निर्दलीय विधायक रविन्द्र सिंह भाटी ने चुनाव मैदान में उतरने की घोषणा कर रखी है।
टोंक-सवाईमाधोपुर: कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव सचिन पायलट की साख दांव पर लगी हुई है। पायलट टोंक से विधायक है और उनके समर्थक माने जाने वाले हरीश मीना को कांग्रेस ने टिकट दिया है। उनके सामने तीसरी बार भाजपा के सुखबीर सिंह जौनपुरिया खड़े हैं।
दौसा: कभी पायलट परिवार की कर्मभूमि रही इस लोकसभा सीट पर इस बार कांग्रेस के मुरारी लाल मीणा का भाजपा के कन्हैयालाल मीना से मुकाबला है। मुरारीलाल मीना लगातार दूसरी बार दौसा से विधायक हैं और पायलट के करीबी माने जाते हैं। उधर, भाजपा ने कन्हैयालाल मीना पर दांव लगाया है। इस सीट पर सचिन पायलट, जसकौर मीना और किरोड़ीलाल मीना की साख दांव पर है।
झुंझुनूं: कांग्रेस के ओला परिवार का इस सीट पर लम्बे समय तक दबदबा रहा है। शीशराम ओला यहां से छह बार सांसद रहे हैं। अब कांग्रेस ने उनके पुत्र बृजेन्द्र ओला को चुनाव मैदान में उतारा है। बृजेन्द्र भी लगातार चौथी बार के विधायक हैं। उनका मुकाबला भाजपा के शुभकरण चौधरी से है। जाट बाहुल्य सीट पर दोनों दलों की निगाहें हैं।
बांसवाड़ा: कांग्रेस छोड़कर भाजपा में शामिल हुए महेन्द्रजीत सिंह मालवीया को टिकट मिला है। यहां भाजपा को भारतीय आदिवासी पार्टी (बीएपी) से थोड़ी चुनौती मिल रही थी। ऐसे में पार्टी को कद्दावर चेहरे की तलाश थी। यह तलाश मालवीया के रूप में पूरी हुई। कांग्रेस ने अभी तक प्रत्याशी घोषित नहीं किया है।
कोटा: लोकसभा स्पीकर ओम बिरला का सीधा मुकाबला कांग्रेस के प्रहलाद गुंजल है। गुंजल ने हाल ही भाजपा छोड़ कांग्रेस का दामन थामा है। गुंजल और कांग्रेस के वरिष्ठ विधायक शांति धारीवाल के बीच रस्साकशी से भी यह सीट हॉट बनी हुई हैं।