कांग्रेस के उम्मीदवारों की दूसरी सूची में तीन ऐसे सच छुपे है जो शायद ही किसी रणनीतिकार को समझ नहीं आये। दोनों लिस्ट में एक अंक 3 आपको चौंका सकता है। दोनों सूचियों में टिकटों की संख्या में आखिरी नंबर 33, 43 हैं। ये नंबर बार-बार कुछ चीजों की तरफ इशारा कर रहे हैं। जो कांग्रेस पहले 106 और इससे ज्यादा नामों की घोषणा करने वाली थी, उसे आखिर ये नंबर क्यों देखने पड़े। दरअसल, राजनीति का पूरा भूगोल और अर्थशास्त्र मैसेज पर टिका है। अब वो भले ही नंबर हो या कुछ और। पहली सूची के करीब 30 घंटे बाद जब 43 नामों की दूसरी सामने आई तो सबसे बड़ा सवाल ये ही था कि आखिर इस सूची में नया क्या है? वही पुराने चेहरे तो हैं? ये तो पहली सूची में भी शामिल हो सकते थे।
दोनों सूचियों में तीन सच साफ नजर आने लगे।
पहला तीन नेता- धारीवाल, राठौड़ और जोशी को हाईकमान ने आंख दिखाई।
दूसरा, पायलट-गहलोत गुट के नेताओं की टिकट क्लियर कर दोनों के एक होने (दिखाने) की तथाकथित कोशिश करना।
तीसरा और परम सत्य। तीन नेताओं को छोड़ प्रत्याशियों के चयन में गहलोत फॉर्मूला ही चलेगा।
पहली सूची की तरह दूसरी में भी वही घोड़े हैं और वही मैदान है। संभवत: कांग्रेस ने तय कर लिया है कि राजस्थान में वो जो रिवाज बदलना चाहती है, उसमें उसके लिए पुराने चेहरे ही मददगार हैं, भले उन्हें लेकर जनता में कितना ही आक्रोश हो। दूसरा, दोनों सूचियों में आलाकमान के सभी फॉर्मूले भी फेल हो गए हैं। भले वो युवाओं को टिकट देने का हो या दो बार हारे हुए प्रत्याशियों को टिकट नहीं देने का हो।
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पहली : इस लिस्ट में कुछ सीट को छोड़ दें तो ज्यादातर वे नाम हैं, जिन्हें टिकट मिलना तय माना जा रहा था। करीब 30 सीटों को होल्ड पर रख लिया गया है। वर्ष 2018 में राजस्थान में कांग्रेस की पहली ही सूची 152 सीटों की थी। इस बार मध्यप्रदेश में कांग्रेस की पहली सूची 144 नामों की रही। ऐसे में ये मैसेज जा रहा है कि यहां पर स्थितियां वहां जैसी नहीं हैं।
दूसरी : आलाकमान और प्रदेश नेतृत्व विवादित नेताओं और बागियों को मौका नहीं देना चाह रहे।
तीसरी: छोटी सूचियों से ये मैसेज भी जा रहा है कि कांग्रेस मैदान में पुराने घोड़ों पर ही सवार होना चाह रही है।
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हाईकमान को आंख दिखा चुके इन नेताओं को अब आलाकमान इंतजार करा-कराकर आंख दिखा रहा है। उम्मीद है कि अंतिम सूचियों तक इनके नाम ऐसे ही घसीटे जाएंगे। अगर ऐसा नहीं होता तो इनके नाम भी घोषित हो चुके होते, क्योंकि मौजूदा 28 में से 21 मंत्रियों को टिकट दिए जा चुके हैं। शांति धारीवाल गहलोत कैबिनेट में सीएम के बाद नंबर 2 के मंत्री माने जाते हैं। गहलोत के सबसे खास हैं, लेकिन उन्हें टिकट नहीं देना इस बात की पुष्टि करता है। दूसरा, धर्मेंद्र राठौड़ पहले जिस पुष्कर सीट पर दावेदारी कर रहे थे, वहां नसीम अख्तर इंसाफ को टिकट दिया जा चुका है।
भाजपा के प्रभाव वाले इलाकों में कांग्रेस ने सीटों को क्लियर नहीं किया है। यहां पर टिकट कटने पर विरोध का भी डर है। हाड़ौती में 17 सीटों में से कांग्रेस ने केवल 2 पर प्रत्याशी घोषित किए हैं। पिछले चुनाव में कांग्रेस ने यहां 7 और भाजपा ने 10 सीटें जीती थीं। कांग्रेस इस बार फूंक-फूंक कर कदम रख रही है।