पाकिस्तान ऑक्यूपाइड कश्मीर यानी वह कश्मीर जो पाकिस्तान के कब्जे में है, वह कश्मीर पिछले कुछ दिनों से युद्ध का मैदान बना हुआ है, जिसका कारण है पाकिस्तानी प्रशासन, जहां के आम लोग अपने ही प्रशासन के अत्याचार के खिलाफ सड़कों पर उतर आए हैं और पूरा POK हिंसा की आग में जल रहा है, पाकिस्तान ने अपना स्तर इतना गिरा लिया है कि वहां के लोगों का विरोध दबाने के लिए पाकिस्तान ने अपनी ही सेना से निहत्थे लोगों पर गोलियां चलवाई, जिसमें सोमवार को चार आम नागरिकों की मौत भी हो गई |
पाकिस्तान इस समय इतिहास के सबसे बड़े आर्थिक संकट से जूझ रहा है। पिछले साल गर्मियों में पाकिस्तान दिवालिया होने ही वाला था लेकिन आखिरी समय में अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष से मिले बेलआउट पैकेज ने उसे बचा लिया। भारत के साथ व्यापार बंद होने के बाद पाकिस्तान में व्यापारियों का एक बड़ा वर्ग बर्बाद हो चुका है। कंगाल पाकिस्तान के पास अब लोगों को दी जाने वाली सब्सिडी भी बंद कर दी है। दूसरी तरफ उसने वसूली के नए-नए तरीके निकाले हैं। बिजली और पेट्रोलियम उत्पादों के दाम आसमान छू रहे हैं। पीओके में स्थिति और भी खराब है, क्योंकि कंगाल पाकिस्तान पहले अपने सूबों को संभालने में लगा है और उसने अपने कब्जे वाले कश्मीर में लोगों को अपने हाल पर छोड़ दिया है।
पीओके में आटा जैसी जरूरी चीजें खरीद पाना लोगों के बस में नहीं रह गया है। बिजली की बढ़ी कीमतों ने लोगों को बेहाल कर रखा है। ये हाल तब है जब पाकिस्तान पीओके के अंदर बिजली का उत्पादन करता है। लेकिन ये बिजली पीओके के लोगों को दिए जाने के बजाय पाकिस्तान के पंजाब प्रांत में पहुंचा दी जाती है। इन सब चीजों को लेकर आम जनता के मन में काफी समय से उबाल था। इस बीच पाकिस्तान सरकार ने एक नया टैक्स जारी कर दिया। इन सबके विरोध में पीओके में व्यापारियों के संगठन जम्मू कश्मीर संयुक्त अवामी एक्शन कमेटी ने शनिवार को एक हड़ताल बुलाई थी। हड़ताल से पाकिस्तानी प्रशासन इतना घबरा गया कि उसने एक दिन पहले शुक्रवार को ही जवानों को भेजकर अवामी एक्शन कमेटी के 70 कार्यकर्ताओं को गिरफ्तार कर लिया। इसकी जानकारी मिलते ही लोग भड़क उठे और सड़कों पर उतर आए।
अवामी एक्शन कमेटी के कार्यकर्ताओं की गिरफ्तारी के बावजूद विरोध प्रदर्शन कमजोर नहीं पड़े और शनिवार को पूरे पीओके बंद हो गया। पीओके की कथित राजधानी मुजफ्फराबाद में हजारों लोग सड़कों पर उतर आए। सार्वजनिक परिवहन, दुकानें, बाजार और व्यापार ठप पड़ गया। यही हाल पीओके के दूसरे जिलों का भी रहा। पाकिस्तानी प्रशासन ने प्रदर्शन को दबाने के लिए हिंसा का सहारा लिया और पाकिस्तान रेंजर्स को बुला लिया गया। प्रदर्शनकारियों को बलपूर्वक रोकने की कोशिश की गई जिसके बाद हिंसा भड़क उठी। प्रदर्शनकारियों ने पाकिस्तानी जवानों पर पत्थरबाजी शुरू कर दी। सोमवार को रेंजर्स ने निहत्थे लोगों पर गोलियां चलाई, जिसमें चार आम नागरिक मारे गए। 90 से ज्यादा लोग घायल हैं और सैकड़ों नागरिकों को हिरासत में लिया गया है। पाकिस्तानी पुलिस के एक एएसआई की मौत हुई है।
पाकिस्तान दुनिया के मंच पर कश्मीर के लोगों के साथ खड़े होने का ढोंग करता है लेकिन उसके कब्जे वाले क्षेत्र में कश्मीरी लोग दोयम दर्जे का जीवन जी रहे हैं। पीओके के नेता लगातार इस्लामाबाद सरकार के भेदभाव का मुद्दा उठाते रहे हैं। पाकिस्तानी अखबार डॉन ने पीओके के कथित प्रधानमंत्री चौधरी अनवारुल हक की शिकायतों पर रिपोर्ट प्रकाशित की थी, जिसमें उन्होंन नीलम-झेलम जलविद्युत परियोजना से बनने वाली 2600 मेगावाट बिजली में हिस्सा नहीं देने का आरोप लगाया था। ये जलविद्युत परियोजना पीओके में ही स्थित है। हक ने ये भी कहा था कि हालिया बजट में सरकारी कर्मचारियों के वेतन में वृद्धि के लिए फंड दिए जाने के उनके अनुरोध को स्वीकार नहीं किया गया था, जिसके बाद उन्हें भुगतान के लिए विकास निधि का उपयोग करने पर मजबूर होना पड़ा था।