संसद में सुरक्षा के चूक से जुडे मामले पर संसद में बीते दिनों से हंगामा हो रहा है। जिसके बाद 92 सांसदों को निलंबित कर दिया गया है। निलंबन के बाद अब विपक्ष सरकार के विरोध में उतर गया है और संसद भवन में स्थित गांधी प्रतिमा के सामने प्रदर्शन किया। इस दौरान विपक्ष के सांसदों ने सरकार के खिलाफ प्रदर्शन किया और तानाशाही मुर्दाबाद के नारे लगाए। हालांकि हंगामे के बाद दोनों संसदों की कार्यवाही को स्थगित कर दिया गया। सांसदों के निलंबन के बाद कांग्रेस और अन्य पार्टियों के नेताओं ने सरकार को घेरा। कांग्रेस नेता जयराम नरेश ने सोश्यल मीडिया पर लिखा कि ये विडंबना है कि जिस BJP सांसद ने दोनों घुसपैठियों को संसद भवन में घुसने में मदद की, उसे निलंबित नहीं किया गया है, जबकि इस घुसपैठ को लेकर गृहमंत्री अमित शाह से बयान की मांग करने वाले I.N.D.I.A ब्लॉक के सांसदों को निलंबित कर दिया गया है।
संसद में सुरक्षा से जुडे मुद्दे को लेकर विपक्ष लगातार सरकार पर निशाना साध रही है। सुरक्षा में चूक से जुडे मुद्दे पर हंगामा करने पर अभी तक 92 सांसदों को निलंबित कर दिया है। जिसमें
18 दिसंबर को लोकसभा से 33, जबकि राज्यसभा से 45 विपक्षी सांसदों को सस्पेंड किया गया। इससे पहले इसी मुद्दे को लेकर हुए हंगामे के बाद 14 दिसंबर को 14 सांसदों (13 लोकसभा और एक राज्यसभा) को सस्पेंड किया गया था।
वहीं राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने सांसदों के निलंबन पर केंद्र सरकार को घेरा है और सोश्यल मीडिया अकाउंट पर लिखा है कि संसद की सुरक्षा में चूक के गंभीर मामले पर चर्चा की मांग करने पर विपक्ष के 92 सांसदों को निलंबित करना लोकतंत्र पर प्रहार है। नेता प्रतिपक्ष रहते हुए स्व. अरुण जेटली एवं स्व. सुषमा स्वराज ने कहा था कि सदन का काम चर्चा करना है पर कई बार सरकार जरूरी मुद्दों पर चर्चा नहीं करती है तो सदन की कार्यवाही को विपक्ष लोकतंत्र के हित में बाधित करता है। सदन की कार्यवाही बाधित करना भी लोकतंत्र का ही एक रूप है। UPA सरकार के समय विपक्ष में रहते हुए BJP ने कई बार 12 दिन से अधिक समय तक सदन की कार्यवाही नहीं चलने दी पर उस समय इस प्रकार सांसदों को निलंबित करने की कार्रवाई नहीं की गई। यह NDA सरकार की अलोकतांत्रिक सोच का परिचायक है।