भारत की मेजबानी मे हुआ जी 20 शिखर सम्मलेन सफलतापूर्वक पूरा हुआ। जी-20 शिखर सम्मेलन के खत्म होने के बाद से ही एक तस्वीर सोशल मीडिया पर वायरल तेजी से वायरल हो रही है। तस्वीर मे प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और रूसी विदेश मंत्री सर्गेई लावरोफ़ एक-दुसरे का हाथ पकड़कर खुलकर बातचीत करते हुए और हंसते हुए नज़र आ रहे है।
कई लोग इस तस्वीर के अलग–अलग मायने निकाल रहे है तो कई लोग कह रहे है कि यह तस्वीर सब कुछ बयान कर रही है।
अंतर्राष्ट्रीय मामलो के विशेषज्ञ एसएल कांतन ने इस तस्वीर पर अपनी प्रतीक्रिया दी है। उन्होंने एक्स यानी ट्विटर के जरिये ट्वीट करते हुए लिखा है, ''मानो दोनों एक-दूसरे से कह रहे हैं - हमने रूसी आक्रामकता के साथ निंदा जैसे शब्दों को जी-20 के प्रस्ताव से दफ़ा कर दिया, बल्कि अब ज़्यादा अच्छा हो गया - 'यूक्रेन के ख़िलाफ़ युद्ध' के बदले 'यूक्रेन में युद्ध'।
आगे एसएल कांतन ने कहा कि भारत की अध्यक्षता में 9 और 10 सितंबर को सफलतापूर्वक जी–20 समिट पूरा हुआ। जी - 20 समिट में जिस साझा प्रस्ताव को पास किया गया है। वह पुतिन के लिए बड़ी जीत है और आधी नींद में रहने वाले बाइडन के लिए बड़ी हार।
वही आपको बता दें कि दिल्ली समिट में जो साझा प्रस्ताव पारित किया गया है। उसमें 'यूक्रेन में युद्ध' लिखा गया है जबकि पश्चिमी देशों की मांग थी कि 'यूक्रेन के ख़िलाफ़ युद्ध' लिखा जाए।
वही बाद मे रूसी विदेश मंत्री सर्गे लावरोव दिल्ली घोषणा पत्र से भी खुश हुए। घोषणा पत्र से भी खुश होकर उन्होंने रविवार को एक प्रेस कांफ्रेंस कर अपनी ख़ुशी जाहिर की। उन्होंने कहा दिल्ली समिट के दौरान जो साझा बयान जारी हुआ है। उसकी मैं तारीफ़ करता हूँ कि यह ग्लोबल साउथ को एकजुट करने वाला समिट है और इससे जुड़े लक्ष्यों को हासिल करने के लिए प्रेरित करता है।
आगे रूसी विदेश मंत्री ने भारत का आभार जताते हुए कहा ''भारत ने जी-20 समिट को राजनीति से बचा लिया है। हमने पश्चिम की उस कोशिश को नाकाम कर दिया। जिसके तहत वे इस मंच का यूक्रेनीकरण करना चाहते थे।
इसके बाद आपको बता दे कि पिछले साल नवंबर के महीने में भारत को जी-20 की अध्यक्षता इंडोनेशिया से मिली थी। भारत ने अपनी अध्यक्षता मे 9 और 10 दिसंबर को हुए जी-20 के शिखर सम्मेलन से पहले मंत्री स्तर की कुल 11 बैठकें की थी।
सभी मंत्री स्तरीय बैठक में सहमति से कोई भी साझा बयान जारी नहीं हो पाया था। बयान साझा नहीं होने के डर से इस बार भी कही ना कही यही डर बना हुआ था कि इस बार भी शायद कोई साझा बयान जारी नहीं हो पाए, लेकिन ऐसा नहीं हुआ और दिल्ली समिट का साझा बयान सबकी सहमति से जारी हो गया।
अब बात करते है कि बाली समिट में जो साझा बयान पास हुआ था उसके बारे मे सुमत मे जो बयान पास हुआ उसमें उसकी भाषा और विषय पर चीन और रूस आख़िरकार सहमत हो गए थे। लेकिन दिल्ली समिट तक आते-आते उनका रुख़ बिल्कुल बदल चुका था।
बाली में जो साझा बयान जारी हुआ था। उसमें यूक्रेन युद्ध से जुड़े पैरा में रूसी आक्रामकता लिखा गया था और रूस की निंदा भी थी। इसके अलावा दिल्ली के बयान में ‘यूक्रेन में युद्ध’ लिखा गया है न कि यूक्रेन के ख़िलाफ़ युद्ध।
ज़ाहिर है कि जी – 20 देश यूक्रेन पर रूसी हमले की निंदा नहीं कर पाए और बाली डिक्लेरेशन से दिल्ली डिक्लेरेशन की भाषा यूक्रेन में रूसी हमले को लेकर बिल्कुल बदल गई।
विदेश मंत्री जयशंकर से बाली डिक्लेरेशन में रूस की निंदा, उसकी आक्रामकता दर्ज होने और दिल्ली डिक्लेरेशन में नहीं होने पर सवाल पूछा गया तो उन्होंने कहा, ''बाली बाली है और दिल्ली दिल्ली है। एक साल में चीज़ें बहुत बदल गई हैं। हम किसी से किसी की तुलना नहीं कर सकते।
लेकिन जब उनसे दिल्ली समिट में जारी हुए। बयान पर यूक्रेन युद्ध से जुड़ी भाषा पर सवाल पूछा गया तो उन्होंने कहा, ‘’यह सच है कि आज की तारीख़ में यूक्रेन बहुत ही ध्रुवीकरण वाला मुद्दा है। इस पर सबके अलग-अलग विचार हैं। सबके विविध विचार हैं। ऐसे में मुझे लगता है कि मीटिंग रूम की हक़ीक़त को दर्ज कर लेना ही सबसे सही तरीक़ा है।’’